Posts

“मूर्ख हैं वो लोग जो मोदी-राहुल की तारीफ करने पर भक्त या चमचा का तमगा जड़ देते हैं”

Image
सोशल मीडिया में कई ऐसे तथाकथित बुद्धिजीवी हैं, जिन्हें लगता है कि नरेन्द्र मोदी को गाली देने से उनकी बुद्धिमत्ता, निष्पक्षता ओरों से ज्यादा है। उन्हें भ्रम है कि बस वे ही सही सोच रहे हैं, उनके हिसाब से ही सब सोचें, सब बोलें, सब लिखें और सब पढ़ें। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की जीत पर कई लोगों को रूदालियां करते, कुंठित पोस्ट करते हुए देखा भी होगा। इन्हें लगता है कि हिंदुस्तान हार गया, जनता हार गई। पर यह भूल जाते हैं कि मोदी को जनता ने ही जिताया है। खैर विषय यह नही है। बात यह है कि क्या प्रधानमंत्री मोदी की तारीफ करना भक्त होने का प्रमाण पत्र है, या उनके बारे में पॉजीटिव लिखना नतमस्तक होना या गोदी मीडिया हो जाना है? इसी तरह राहुल गांधी को नेता बताने पर या उनकी प्रशंसा करने पर भी कई लोगों के पेट में मरोड़े उठने लगती हैं। लेकिन चुनावी गर्माहट में ट्रेंड यही चल रहा था। चुनाव के वक्त कई ऐसे मित्र हैं जो सोते-जागते मोदी को गालियां देते रहे और अनुभव करते रहे कि देशहित में उन्होंने बड़ा काम किया है। कई राहुल को पप्पू, नकारा बताकर ऐसा फील करते थे जैसे कोई बड़ी जंग जीत ली गई हो। आप जब ज...

वो गोलियां आज तक इजाद नहीं हुई, बमों में इतनी ताकत नहीं कि वो हौंसला तोड़ सकें

Image
बस्तर बेहद खूबसूरत है , छत्तीसगढ़ की सुंदरता बस्तर है , असल में बस्तर को आप छत्तीसगढ़ की आत्मा भी कह सकते हैं , ये जो तस्वीर आपको वॉल पर दिख रही है , यह एक करारा तमाचा है उन कायर नक्सलियों को , लाल आतंक फैलाने वालों को जो सोचते हैं कि उनके धमाके हमें खमोश कर सकते हैं , दो दिन पहले दंतेवाड़ा नक्सली हमले में मारे गए विधायक भीमा मंडावी का परिवार इस खूबसूरत , ताकतवर फोटो में दिख रहे हैं , वे आज मतदान करने गए थे , बेटे की चिता की आग ठंडी भी नहीं हुई कि वे उनके बेटे के हत्यारों को कारारा जवाब देने वोट करने पहुंचे। यह उन लोगों के लिए एक तरह से सबक है , जो यह सोचकर वोट करने नहीं जाते की भीड़ होगी , लाइन लगी होगी , मुझे क्या फायदा , मेरे वोट देने से क्या होगा। ऐसा सोचने वालों को इस हौसले से भरी तस्वीर को बार-बार देखना चाहिए क्योंकि ये जान पर खेलकर वोट देने पहुंचे थे , बेटे को खोकर वोट करने पहुंचे थे। नक्सली देख ले उनकी दहशत और कायरानापन से बस्तर रुकने वाला नहीं है , न ही उन लोगों के आरोपों से जो इनकी हिमायत करते हैं। यह लड़ाई लोकतंत्र बनाम गनतंत्र की है , बुलेट बनाम बेलेट की ह...

मानव जीवन का आधार शुद्ध आहार शाकाहार

Image
शाकाहार क्यों जरूरी ? ·          भगवान महावीर के अनुयाई जिन्होंने अंहिसा को ही परम धर्म कहा है , उनके मानने वाले लोग मांसाहारी कैसे हो सकते हैं। ·          दुनियां के उत्कृष्ट कोटि के चिकित्सकों और वैज्ञानिकों का कहना है कि शाकाहार भोजन पद्धति सर्वश्रेष्ठ है। वैज्ञानिकों ने यह सिद्ध किया है कि शाकाहार भोजन में भोजन तन्तु अधिक पाये जाते हैं। ·          आदमी को , स्वाभाविक रूप से , एक शाकाहारी होना चाहिए , क्योंकि पूरा शरीर शाकाहारी भोजन के लिए बना है। वैज्ञानिक इस तथ्य को मानते हैं कि मानव शरीर का संपूर्ण ढांचा दिखाता है कि आदमी गैर-शाकाहारी नहीं होना चाहिए। शाकाहारियों के बीच शाकाहार की बात क्यों की जाती है ? - यह सवाल आप सभी के मन में उठना जायज है कि हम तो शाकाहारी हैं फिर हमें क्यों इसके गुणदोष बताए जा रहे है ? कारण ·          हम संडे हो या मंडे रोज खाओ अंडे वाले विज्ञापन समय में जी रहे हैं · ...

सियासत का रंग एक

तुम कर्जमाफी करो हम आरक्षण देंगे तुम रफेल चिल्लाओ हम बोफोर्स बताएंगे न देश की फिक्र तुम करो न हम देश को बढ़ाएंगे सत्ता तुम्हें भी चाहिए कुर्सी हम भी नहीं छोड़ेंगे वोट के लिए सब जायज है कभी हम तुम हो जाएंगे कभी तुम हम हो जाओगे

घर से विदा सिर्फ लड़कियां ही नहीं होती लड़के भी होते हैं?

दसवीं का रिजल्ट आया ही था, मार्कशीट के साथ ऐसा लगा जैसे घर छोड़ने का फरमान आया हो। आगे की पढ़ाई के लिए घर छोड़ना था। मेरे जैसे कई युवा ऐसे ही पहली बार घर छोड़ते हैं पढ़ने के लिए, अपने और अपनों के सपने पूरे करने के लिए, उम्मीदों को पंख देने के लिए, बड़ा बनने के लिए। सब कुछ मिलता है जो सोचा गया था सिवाय घर के। घर से निकलते समय शायद ये अहसास ही नहीं हुआ कि ये विदाई ही है अब घर ब्याही गई बहनों की तरह ही कभी-कभी ही आना हो होगा। घर से निकलने के कई सालों तक हमारे जहन में ये बात नहीं आती लेकिन कभी आंख बंद करके सोचो तो समझ आता है कि पढ़ाई और फिर पढ़ाई के फल ने हमें अपने घर से हमेशा के लिए दूर कर दिया। अपने मां-बाप से दूर। अब हम सिर्फ फोन पर या त्यौहार पर ही साथ होते हैं। याद नहीं आता कभी एक पूरा हफ्ता इन 10-15 सालों में साथ गुजारा हो। हम मस्त हैं अपने काम में और मां-बाप खुश है संतोष में कि उनके बेटे ने तरक्की कर ली। जैस-जैसे समय गुजरता जाता है हम दूर होते जाते हैं उनसे वो जब भी फोन करो कुशलक्षेम के साथ एक बार जरूर पूछते हैं कि घर कब आ रहे हो और हमारा हमेशा जवाब होता है जब छुट्टी मिलेगी तब।...

“जो नहीं मिलता है, वही तुम्हें दौड़ाता है”

हम सभी दौड़ रहे हैं, ख्वाब बुन रहे हैं, ख्वाहिशों के घोड़े दौड़ा रहे हैं, इच्छाएं, महत्वाकाक्षाएं, सपने दिखा रही हैं, स्मृतियों में भले ही भूत सुंदर न हो पर भविष्य की सफलता रोमांच पैदा कर रही है। विचारों की इसी उधेड़बुन को उम्मीद कहते हैं, हम में से अधिकतर लोग सुबह उठकर सफल होने का संकल्प लेते हैं। कार्य योजना तैयार करते हैं, मन को दृढ़ करते हैं, खुद को समझाते हैं, भूत को भुलाने की सलाह देते हैं, भविष्य को बेहतर करने का खुद से वादा करते हैं। इसलिए सुबह हमेशा खूबसूरत होती है..लेकिन जैसे-जैसे सूरज सिर पर चढ़ता है..वैसे-वैसे हमारे सपने स्मृति से विलुप्त होने लगते हैं..आखिरकार रात अपराध बोध में गुजरती है कि फिर एक दिन गुजर गया..कुछ नहीं बदला..दरअसल हम पूरे जीवन में सिर्फ तैयारियां करते हैं..तैयार नहीं हो पाते। सवाल ये है कि तो क्या सपने देखना बंद कर दें, जड़ हो जाएं, उम्मीदों का गला घोंट दें, महत्वाकांक्षाओं को मृत मान लें। यदि ऐसा है तो फिर जीवन क्या है..रक्त का संचार उम्मीद ही तो है, सपने ही तो हैं वे मर जाएं तो फिर जिंदगी क्या है...देखिए..जितना हो सके उतना देखिए..हर दिन..हर क...

किसी बिना मोबाइल वाले इंसान से मिलना चाहता हूं..वही बता पाएगा सुकून क्या है?

हमारी आंखें मोबाइल देखने के बाद खुलती है और शायद बंद भी मोबाइल देखने के बाद ही होती हैं। इस बीच गुजरने वाले 24 घंटे मोबाइल की दुनिया में ही गुजरते हैं। क्योंकि उसके बिना हमारा काम नहीं हो सकता। या कहें उसके बिना हम जिंदा नहीं रह सकते। एक पल, एक क्षण, एक मिनिट बिना मोबाइल के होना मन में कंपन सी पैदा कर देता है। जब मोबाइल साथ हो या न भी हो तब भी हम उसकी गिरफ्त में होते हैं। इतनी आदत तो हमें किसी चीज की नहीं है शायद जितनी मोबाइल की है। जब मोबाइल शुरू हो रहा था तब बीएसएनएल एक विज्ञापन दिखाता था कि दूरियां करें कम, रहें अपनों के संग.. फिर हजार किमी दूर बैठा सिपाही घर में इंतजार कर रही अपनी बीबी से बात कर रहा होता था। उस समय सोचने में ही रोमांच आ जाता था कि हम हमेशा अपनों से कभी भी कहीं भी बात कर पाएंगे। बहुत सुंदर स्वप्न था जो पूरा हुआ हमारी दूरियां कम हो गई। हम नजदीक आ गए। सब साथ हैं। हम जब चाहे एक दूसरे से बात कर सकते हैं देख सकते हैं लेकिन क्या सच में दूरियां कम हुई हैं क्या हम सच में साथ आए हैं। अब समझ आ रहा है कि ये सिर्फ गलतफमियां थी। दुनिया का कोई भी आधुनिक संसाधन रिश्ते मजबूत ...