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कोशिस करता हु की हमेशा अपने अपने आप से ही बाते करता रहू पर जब भावनाओ का आवेग बड जाता है, तो शब्दों के द्वारा उन्हें बताने का प्रयास करता हूँ ! में बास्तव में अपने आपको ही खोजने की  कोसिस कर रहा हूँ !                          "खोजता फिरता हु ये यार अपने आपको आप                             आप ही खोया आप ही मंजिल हु में " 

!!!!!!!!!!!!!!!!!!!जब सत्य की आंधी चलती है!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!

                               कहते है सत्य परेशान हो सकता है पर पराजित नहीं यह बात मिस्त्र में हुए क्रन्तिकारी              आन्दोलन  से सही भी साबित  हो गई मिस्त्र की क्रांति ने दिख दिया की जब जनता बोलती है  या जनता  जब        जगती है तो दुनिया  का कितना भी शक्तिसाली साम्राज्य क्यों नहो या कितना ही बड़ा तानशाह क्यों  न हो सभी    की जड़े  हिल जाती है क्युकी सत्य की  एक आंधी असत्य के पहाड़  को दहा  देती है! जरूरत होती है तो बस जनता की एकजुटता की बाकि तो सब कार्य अपने आप ही  हो जाया करते है मिस्त्र के क्रन्तिकारी आन्दोलन ने दुनिया को दिखा दिया की कैसे अपनी स्वतंत्रता के लिए संघर्ष  किया जाये भले ही क्रांति के दोरान मिस्त्र को बहुत सी समस्यों का समना करना पड़ा हो उसके  कुछ लोगो  को अपने प्राणों की आहुति क्यों न देनी पड़ी हो  पर संघर्स के बाद जो सूर्य  उदित होता है तो ह...

प्रेम का अहसास

प्रेम सम्वेदनाओ भावनाओ का संगम  जिसमे सिर्फ मीठे अहसास  प्रति क्षण अतर्मनमें  में उमड़ते है  खट्टी मीठी यादो के साथ  प्रेमी ही सारा जहाँ लगता ह सारा ब्रम्हांड ऐसा प्रतीत होता है  मनो प्रेमी में समां गया हो  प्रेम या मुहब्बत में बस  प्रेम होता वहा सब इच्छाए  मह्त्वाकंछाये और सपनों  में बस प्रेम वह प्रेमी ही रहता है  प्रेम एक ऐसा अहसास है उजो  आत्मा से आत्मा का मिलन  करता है ऐसा लगता है  मानो परमात्मा का सरोकार  हो रहा हो क्यूकि धयान का  धेय और  ज्ञान का गेय  वंहा सिर्फ प्रेमी ही होता है  ऐसा लगता है मेरा अस्तित्व  उसमे ही स्म जाये और हम सिर्फ एक एक और बस एक हो जाये !!!!!!
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वो एहसास अपना सा जिसमे बस प्रेम है निर्भीक निस्वार्थ प्रेम संवेदनाये ,संचेतानाओ से भरा अद्भुत अनुपम प्रेम समर्पण से भरा हमारी खुशियों की दुआओं से भरा जिसमे वांछा कांक्षा कुछ भी नहीं बस है तो प्रेम प्रेम और प्रेम प्रेम की सीमा और सरहदों से पार वो अनुपम प्रेम मेरी ख़ुशी सफलता के लिए समर्पित वो प्रेम मात्र उस आँचल के अन्दर है जो हमेशा हर वक़्त हर क्षण हमारी खुसी के सपने संजोती है,प्रार्थनाये करती है येसे उस प्रेम का एहसास मात्र ... मात्र माँ के प्रेम मैं ही संभव है !!!!! अभिषेक जैन Posted by भटकन at 10:58 AM 0 comments

भोपाल गैस त्रासदी की वो कलि रात........................

उस काली रात के बारे में सोचता हु तो सहम जाता हूँ      चाह कर भी अस्को को अपने न रोक पता हूँ बड़ी मनहूस थी वो रात क्यों उसे सीने बिठा रखा है    यही बस सोच-सोचकर नींद से में जग उठता हूँ न जाने कितने मासूमो को लीला था उस काली रात ने     तडपता देखकर उनको आज में सहम उठता हूँ इतनी लम्बी नींद सोये सूरज न कभी बो देख पाए सोचकर हालत उनके दर्द से करह उठता    हूँ कभी न हो ऐसी मनहूस रात इस धरातल पर यही बस दुया हर दम खुदा से किया करता हूँ

आज के मानव की तस्वीर ,,,,,,,

जब कभी रोड पर भोखे नंगे लोगो को बिलखते देखता हु तो दिल पसीज जाता है मानवता पर शर्म आती है | और सामने एक तस्वीर सामने आती है ,इस भारत देसे की उस बोध महावीर की सिक्षा ,गाँधी के सपनो की जिन्हें उनोहोने अपने सपनो में सजाया था इस भारत देश की तस्वीर खिची थी पर सायद वो सपना आज धूमिल हो गया हम सम विस्मिरित कर गए ,हमें दुसरो का दुःख दिकना बंद हो ,हमें अब सिर्फ अपना दुःख ही दुःख लगता है बाकि का नहीं ,हमें अपने ही बस अपने लगते है दुनिया के अन्य लोगो की हमें परवाह नहीं |आज हम महज अपने स्वार्थ  में मस्त है ,और सिर्फ अपने बारे में सोचते है |पर क्या यही हमारी मानवता है यही हमारा धर्म है |पूरी दुनिया में जिस संस्कृति के हम गुण गाते रहते है ,क्या यही हमारी संस्कृति है ,की हमारा पडोसी भूखा रहे और हम मजे से खाए ,हमारी संवेदनाये मर गयी है हमारी मानवता समाप्त हो गयी है जिसके कारन हमें रोते बिलखते लोग  नजर आते है,कभी उनके चहरे पर खुसी नजर नहीं आती ,पर सायद यही दिन हमारे साथ भी अ सकता है          ...
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                                हाँ में सपने देखता हूँ                                 जिंदगी में कुछ कर गुजरने के                             "    कुछ पाने के जिन्दगी महकने के                                 पर क्या वो सच होंगे या नहीं                        ...