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सफलता और असफलता के चक्रव्यू में फसी जिन्दगी

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         किसी ने सही कहा है की जिन्दगी ऐसी अबूझ पहली है जिसे जिसने जितना समझा वो उतना ही जिन्दगी के सम्बन्ध   में नासमझ या कहे अन्जान होता गया | ,,, जिन्दगी तो   एक ऐसा खेल है , जिसे खेलना तो सबको पड़ता है|पर कुछ लोग उसमे हर दम जीतते रहते हैं   और खुशिया मानते हैं   और कुछ के नसीब   में बस होती है   मायूशी और हर   दम दुखो की बरसात ... खेर जिन्दगी के दो पुत्र और भी है जिन्हें हम सफलता और असफलता के नाम से जानते हैं | यह दोनों हर दम साथ - साथ ही रहते है और चुकीं हैं तो   यह दोनों सगे भाई ही पर दोनों का काम कुछ अलग जरुर है | हा कुछ - कुछ समानता   भी है इनमे   पहली बात तो यह किसी   के भी   सगे नहीं होते हैं | कभी  किसी के गर मातम मनवा देते हैं , तो किसी के घर खुशियों का माहोल बना देते है | इनकी कहानी भी जिन्दगी   की तरह ही अबूझ है | जिसे जितना समझना हो समझ...

गणतंत्र दिवस और कुछ कही कुछ अनकही बातें ....सच के आइने में !!!!!!!!

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                                                कहा जाता है की "वक्त की सबसे अच्छी  बात ये है की वह बीत जाता है और शायद सबसे बुरी बात भी यही है" पर कुछ बातें  या घटनाएँ  ऐसी होती है  जो शायद कभी  नहीं बीतती क्यूंकि  वह हमारे दिलों से जुडी हुई है| और दिलकी ख़ुशी और गम सब दिल में ही रहे है, और वक्त आने पर अपने आप ही उभर आते है|  ऐसी ही एक ख़ुशी 15 अगस्त 1947   को हर भारत वासी को मिली जिसकी ख़ुशी वह आज भी दिल में रखे है. और उसका खुमार हर 15 अगस्त को देखने  भी मिलता है| उसके साथ ही साथ नये साल की ख़ुशी के साथ- साथ एक और ख़ुशी हमे हर साल मिलती है   और वो ख़ुशी का दिन होता है २६ जनवरी चूँकि 26 जनवरी १९५०   को ही हमारे देश का संविधान लिख कर पूर्ण हुआ था. और हर देशवासी ने शान  से अपना सर ऊँच...

भीगा मन छलकते आंसू और दम तोडती संवेदनाये !!!!!!!!!!

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                         दुनिया में सबसे सुंदर यदि कुछ है तो वह इन्सान ही है क्यूंकि  "विश्व की समस्त सुंदर वस्तुओ का सृजन मानव ने किया है, इसलिए  सृजन करता की सुन्दरता को नाकारा नहीं जा सकता क्यूंकि जब सृजन में ही सुन्दरता का वास होता है और उसको केवल सुंदर मनोभाव वाला ही कर सकता है .....चूँकि मानव के मनोभावों की यदि हम बात हम करे तो उसमे क्रोध मान  माया हास्य रति जुगुप्सा प्रेम सबका समावेश है,और उसकी अच्छी  - बुरी अभिव्यक्ति भी समय समय पर हमारे  अभिप्राय  अनुरूप होती रहती है, इसलिए कहा जाता है की परिणामो की सम्हाल करो या  अपने को  सयंमित   करो क्यों  असयन्मित  जीवन  बिना ब्रक की गाड़ी है , तो जरुरी यह है की हम खुद का परिक्षण प्रतिदिन करते रहे क्यूंकि  स्वपरीक्षण के आभाव में तुम अपने से इतने दूर हो जाओगे की अपने अस्तित्व को भी नहीं खोज पाओगे यही बात स्वामी विवेकानंद जी ने भी कही थी की "दिन में एक ब...

आज का युवा ......सिगरेट शराब और सर्वनाश..... के बीच मौत का खेल

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                        कहा जाता है की किसी भी राष्ट्र  का विकास वहां के युवाओ पर निर्भर करता , है जिस देश के युवा जितने ज्यादा  जागरूक  जोश जूनून और जज्बे से भरे होंगे उस देश की विकास दर  भी उतनी ही अधिक    होगी , इसलिए कहा जाता है युवा शक्ति राष्ट्र शक्ति होती है ....युवा  राष्ट्र  के लिए प्राण वायु है इसलिए युवाओ की जिम्मेदारी आज बहुत अधिक  बढ गई है पर शायद  इस बात का भान युवाओ में कम ही देखने को मिल रह है और आज के युवा उस राह  पर चल रहे है जिसका अंत काफी दर्द नाक और भयावह है  .....कहते है एक जिन्दगी को तवाह करने के लिए एक बुरी लत ही काफी है और शायद  वाही बुरी लत आज के युवाओ में लग गई है ...पाश्चात्य देशो की ऐसी आंधी चली  लगी की लगभग आज पूरा का पूरा युवा वर्ग उस लत  ग्रसित है   धुम्रपान सच में एक  ऐसा मीठा जहर है जो स्वाद   तो अमृत का देता  है परन्तु  काम कुछ और ही करता है, ना जाने कितनी  जिन्दग...

सुख दुख के खेल मे उल्झा जीवन

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                                          बहुत सुंदर गीत है ,और उसकी ही एक बहुत ही सुंदर पंक्ति है "सुख     आते है दुःख आते है हम सुख दुःख के झमेले में मस्त रहते है मदमस्त रहते है .....और सायद  यही दो लाइन   समझ आ जाये तो सारा  जीवन सुखमय हो जाये क्यों पूरी की पूरी दुनिया इसी  सुख दुःख की उधेड़बुन में लगी है किसी को भी समझ नहीं आता  की वो क्यों दोड़ रहा है उसे चाहिए क्या है ,और इस तरह निरुद्देश्य  दोड़ लगाने से उसे निराशा के आलावा कुछ मिलने वाला नहीं है...आज लगभग हर इन्सान उस सुख की  खोज  में दर बदर भटक रहा है जिसकी उपलब्धि  संसार में है ही नहीं वो जो सुख चाहता है वो तो उस निराकुल परमात्मा में है ..पर जब उसे यह पता चलता है की वह  सुख परमात्मा के पास है तो वह मंदिरों मस्जिदों और ग़ुरुद्वारो के चक्कर लगाने लग जाता ह...

विचारों का अंर्तद्वंद.........

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                                             जब कभी आखें बंद करके सोचता हूँ                तो सिर्फ अंधेरा दिखाई देता है             फिर अपने आप से बाते करने             लगता हूँ,अपने को समझाने की              फिर भी दिल बार बार अपने              आप से ना जाने कितने प्रश्न               करता है,और कभी भी कोई               उत्तर डूंड नहीं पाता हूँ मेरे       ...

मुम्बई.............बम और...........बेकसूर।।।।।।।।।।।

       मुम्बई   शहर के बारे में कहा जाता है की,यह एक ऐसा शहर है जहाँ कब किस्मत बदल जाये ।कब कोई करोड़पति बन जाये ओर कब रोड़पति पता ही नही चलता।        पर शायद अब यह उक्ति मुम्बई के लिए उचित नही बैठती क्योंकि अब इस के बारे कहा जाना चाहिए ,कि मुम्बई वह शहर जहाँ कब मौत कि बरसात हो जाये पता हि नही चलता ।कब पूरा का पूरा शहर काल के गाल में समा जाये कोई भरोसा नही।          खैर यह ज्यादा महत्वपूर्ण बात नहीं है ,ज्यादा जरूरी बात तो यह हैं कि अब पूरी जिंदगी मौत के डर के साथ जीना होगा ।पर सच बात तो यह कि मरने से ज्यादा खतरनाक मरने का डर होता है.......ओर हम कह सकते है कि मुम्बई में आज आदमी हर घड़ी मर रहा है.....उसके पास सांसे तो है पर सांसो का भरोसा नहीं है ।        यदि हम एक बात पर विचार करेकिमुम्बई में ही क्यों सबसे अधिक आतंकवादी हमले क्यों होते है तो हमें पता चलेगा कि......मुम्बई एक ऐसा शहर है जहाँ सारा हिन्दोस्तान   बसता है। और मुम्बई कि बरबादी से सारा भारत बर...