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आस्था का सिंहासन ......पाखंड का आरोप .....धर्म ,धंधा या कुछ और .........!!!!!!!!

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                                           धर्म जीवन का हिस्सा नहीं होता जीवन ही  होता है क्योंकि धर्म से ही हमारे जीवन का तानाबाना बुना जाता है ...शायद इसलिए भारत देश में धर्म को परीक्षा करके नहीं अपनाया जाता बस भगवान का नाम सुनकर ही सर झुका दिया जाता है |क्योन्कि धर्म पर शक करना हमें  धर्म का अपमान लगता है और दैवीय आपदा का भय बना रहता हैं |पर क्या सच में  धर्म  को आंखे बंद करके बिना विचारे स्वीकार कर लेना उचित है |जब हम सारी की सारी दुनिया का भरोसा बिना परीक्षा के नहीं करते तो फिर धर्म को ही क्यो आँखो पर पट्टी बांध कर स्वीकार कर लेते है ....और चिंतनीय बात तो तब और भी हो जाती है जब धर्म के पुरोधा भी यही सलाह देते नजर आते है |सच में ध्रतराष्ट्र के अंधे होने पर गांधारी का अपनी आँखो पर पट्टी बांध लेना कहा का उचित था यदि परिस्थियों को तत्समय अपनी आँखो से वो देखती तो शायद  महाभारत जैसे महा नरसंहार के युद्ध से बचा जा सकता था |पर शायद इस देश की यही परम्परा रही...

मोहब्बत....

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  मुहब्बत   की बातों ने मुहब्बत  से मुहब्बत  करा दी बस खामखाँ परेशानियों की घुटी  पिला दी  बहुत सपने देखे थे रातों को मुहब्बत के  सुबह के सूरज  ने उसकी हकीकत बता दी   प्रमिका के साथ गुजारे लम्हों और यादों ने  जिन्दगी के अनमोल वक्त को तबाह कर दिया  और बेचेनी और तडपन भरी दुनिया  दिखादी  अब तो खामोशियाँ  भी खामोश नहीं होने देती   खामोशियों ने ही मोहब्बत की दास्ताँ दुनिया  को सुना दी   अब बस गुमशुम उदास रहता हूँ मोहब्बत  करके  मोहब्बत के कारण दुनिया ने मुझे नाकारा समझा  यही मोहब्बत करने की मुझे दुनिया  ने सजा दी !!!!!!!!!!

सफलता और असफलता के चक्रव्यू में फसी जिन्दगी

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         किसी ने सही कहा है की जिन्दगी ऐसी अबूझ पहली है जिसे जिसने जितना समझा वो उतना ही जिन्दगी के सम्बन्ध   में नासमझ या कहे अन्जान होता गया | ,,, जिन्दगी तो   एक ऐसा खेल है , जिसे खेलना तो सबको पड़ता है|पर कुछ लोग उसमे हर दम जीतते रहते हैं   और खुशिया मानते हैं   और कुछ के नसीब   में बस होती है   मायूशी और हर   दम दुखो की बरसात ... खेर जिन्दगी के दो पुत्र और भी है जिन्हें हम सफलता और असफलता के नाम से जानते हैं | यह दोनों हर दम साथ - साथ ही रहते है और चुकीं हैं तो   यह दोनों सगे भाई ही पर दोनों का काम कुछ अलग जरुर है | हा कुछ - कुछ समानता   भी है इनमे   पहली बात तो यह किसी   के भी   सगे नहीं होते हैं | कभी  किसी के गर मातम मनवा देते हैं , तो किसी के घर खुशियों का माहोल बना देते है | इनकी कहानी भी जिन्दगी   की तरह ही अबूझ है | जिसे जितना समझना हो समझ...

गणतंत्र दिवस और कुछ कही कुछ अनकही बातें ....सच के आइने में !!!!!!!!

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                                                कहा जाता है की "वक्त की सबसे अच्छी  बात ये है की वह बीत जाता है और शायद सबसे बुरी बात भी यही है" पर कुछ बातें  या घटनाएँ  ऐसी होती है  जो शायद कभी  नहीं बीतती क्यूंकि  वह हमारे दिलों से जुडी हुई है| और दिलकी ख़ुशी और गम सब दिल में ही रहे है, और वक्त आने पर अपने आप ही उभर आते है|  ऐसी ही एक ख़ुशी 15 अगस्त 1947   को हर भारत वासी को मिली जिसकी ख़ुशी वह आज भी दिल में रखे है. और उसका खुमार हर 15 अगस्त को देखने  भी मिलता है| उसके साथ ही साथ नये साल की ख़ुशी के साथ- साथ एक और ख़ुशी हमे हर साल मिलती है   और वो ख़ुशी का दिन होता है २६ जनवरी चूँकि 26 जनवरी १९५०   को ही हमारे देश का संविधान लिख कर पूर्ण हुआ था. और हर देशवासी ने शान  से अपना सर ऊँच...

भीगा मन छलकते आंसू और दम तोडती संवेदनाये !!!!!!!!!!

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                         दुनिया में सबसे सुंदर यदि कुछ है तो वह इन्सान ही है क्यूंकि  "विश्व की समस्त सुंदर वस्तुओ का सृजन मानव ने किया है, इसलिए  सृजन करता की सुन्दरता को नाकारा नहीं जा सकता क्यूंकि जब सृजन में ही सुन्दरता का वास होता है और उसको केवल सुंदर मनोभाव वाला ही कर सकता है .....चूँकि मानव के मनोभावों की यदि हम बात हम करे तो उसमे क्रोध मान  माया हास्य रति जुगुप्सा प्रेम सबका समावेश है,और उसकी अच्छी  - बुरी अभिव्यक्ति भी समय समय पर हमारे  अभिप्राय  अनुरूप होती रहती है, इसलिए कहा जाता है की परिणामो की सम्हाल करो या  अपने को  सयंमित   करो क्यों  असयन्मित  जीवन  बिना ब्रक की गाड़ी है , तो जरुरी यह है की हम खुद का परिक्षण प्रतिदिन करते रहे क्यूंकि  स्वपरीक्षण के आभाव में तुम अपने से इतने दूर हो जाओगे की अपने अस्तित्व को भी नहीं खोज पाओगे यही बात स्वामी विवेकानंद जी ने भी कही थी की "दिन में एक ब...

आज का युवा ......सिगरेट शराब और सर्वनाश..... के बीच मौत का खेल

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                        कहा जाता है की किसी भी राष्ट्र  का विकास वहां के युवाओ पर निर्भर करता , है जिस देश के युवा जितने ज्यादा  जागरूक  जोश जूनून और जज्बे से भरे होंगे उस देश की विकास दर  भी उतनी ही अधिक    होगी , इसलिए कहा जाता है युवा शक्ति राष्ट्र शक्ति होती है ....युवा  राष्ट्र  के लिए प्राण वायु है इसलिए युवाओ की जिम्मेदारी आज बहुत अधिक  बढ गई है पर शायद  इस बात का भान युवाओ में कम ही देखने को मिल रह है और आज के युवा उस राह  पर चल रहे है जिसका अंत काफी दर्द नाक और भयावह है  .....कहते है एक जिन्दगी को तवाह करने के लिए एक बुरी लत ही काफी है और शायद  वाही बुरी लत आज के युवाओ में लग गई है ...पाश्चात्य देशो की ऐसी आंधी चली  लगी की लगभग आज पूरा का पूरा युवा वर्ग उस लत  ग्रसित है   धुम्रपान सच में एक  ऐसा मीठा जहर है जो स्वाद   तो अमृत का देता  है परन्तु  काम कुछ और ही करता है, ना जाने कितनी  जिन्दग...

सुख दुख के खेल मे उल्झा जीवन

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                                          बहुत सुंदर गीत है ,और उसकी ही एक बहुत ही सुंदर पंक्ति है "सुख     आते है दुःख आते है हम सुख दुःख के झमेले में मस्त रहते है मदमस्त रहते है .....और सायद  यही दो लाइन   समझ आ जाये तो सारा  जीवन सुखमय हो जाये क्यों पूरी की पूरी दुनिया इसी  सुख दुःख की उधेड़बुन में लगी है किसी को भी समझ नहीं आता  की वो क्यों दोड़ रहा है उसे चाहिए क्या है ,और इस तरह निरुद्देश्य  दोड़ लगाने से उसे निराशा के आलावा कुछ मिलने वाला नहीं है...आज लगभग हर इन्सान उस सुख की  खोज  में दर बदर भटक रहा है जिसकी उपलब्धि  संसार में है ही नहीं वो जो सुख चाहता है वो तो उस निराकुल परमात्मा में है ..पर जब उसे यह पता चलता है की वह  सुख परमात्मा के पास है तो वह मंदिरों मस्जिदों और ग़ुरुद्वारो के चक्कर लगाने लग जाता ह...