Posts

दिल का दर्द शब्दों में बयाँ कर

बहुत  दिनों  बाद  कुछ  लिखने को  कलम मचल गई फिर  क्या  था दिल  की  बात  कागज पर  उतर  गई  क्या  बताता क्या छीपाता कब तक खुद को रोक पाता लिखते  लिखते  जिन्दगी  की   कहानी आंख भर गई उलझनों   ने   इस  कदर  उलझा   के  रख  मुझे की  खुद   को  समझने   में   फिर   उम्र  गुजर  गई मौत  भी  दरवाजे    पर  आकर  लौट  गई  शायद लगता है जिन्दगी की उलझने देख कर वो भी डर गई

यादो में जिन्दगी या जिन्दगी में यादें .......[यादो का सफरनामा पार्ट -१]

Image
                   कहते है कुछ यादें  जिन्दगी बन जाती है जिन्हें हम चाह  कर भी  भुला नहीं पाते क्यूंकि अच्छी यादो की यह बहुत अच्छी   बात होती  है की उन्हें याद नहीं रखा जाता वह याद रह जाती है |और फिर वही यादें हमारी जिन्दगी बन जाती है और  जिन्दगी  वाही यादें बनती है जिसे हम दुबारा  नहीं जी सकते हर किसी  की जिन्दगी में ऐसे पल आते है जिसे वह हम  कभी भूलना नहीं चाहता क्यूंकि  जिन्दगी के संध्याकाल में वाही तो एक चीज़ होती है जो जिसे याद करके हम  हमेशा खुश रहते  है इसलिए कहते की जिन्दगी में यादें नहीं होती यादो में जिन्दगी हुआ करती है |    दोस्तो में यह सब बाते ऐसे ही नहीं लिखता जा रहा हु चूँकि बिगत कुछ दिनो पहले मेरी कॉलेज  लाइफ ख़त्म हुई है  और हमने अपने  कॉलेज के दिनो में बहुत एन्जॉय किया है क्यूंकि हमने  हर वो ख़ुशी एकदूजे को देने की कोशिश की है  जिसे  हम जीने चाहते थे |और शायद उन लम्हों को यद् करके हमारी जिन्दगी गुजर जाएगी...

आस्था का सिंहासन ......पाखंड का आरोप .....धर्म ,धंधा या कुछ और .........!!!!!!!!

Image
                                           धर्म जीवन का हिस्सा नहीं होता जीवन ही  होता है क्योंकि धर्म से ही हमारे जीवन का तानाबाना बुना जाता है ...शायद इसलिए भारत देश में धर्म को परीक्षा करके नहीं अपनाया जाता बस भगवान का नाम सुनकर ही सर झुका दिया जाता है |क्योन्कि धर्म पर शक करना हमें  धर्म का अपमान लगता है और दैवीय आपदा का भय बना रहता हैं |पर क्या सच में  धर्म  को आंखे बंद करके बिना विचारे स्वीकार कर लेना उचित है |जब हम सारी की सारी दुनिया का भरोसा बिना परीक्षा के नहीं करते तो फिर धर्म को ही क्यो आँखो पर पट्टी बांध कर स्वीकार कर लेते है ....और चिंतनीय बात तो तब और भी हो जाती है जब धर्म के पुरोधा भी यही सलाह देते नजर आते है |सच में ध्रतराष्ट्र के अंधे होने पर गांधारी का अपनी आँखो पर पट्टी बांध लेना कहा का उचित था यदि परिस्थियों को तत्समय अपनी आँखो से वो देखती तो शायद  महाभारत जैसे महा नरसंहार के युद्ध से बचा जा सकता था |पर शायद इस देश की यही परम्परा रही...

मोहब्बत....

Image
  मुहब्बत   की बातों ने मुहब्बत  से मुहब्बत  करा दी बस खामखाँ परेशानियों की घुटी  पिला दी  बहुत सपने देखे थे रातों को मुहब्बत के  सुबह के सूरज  ने उसकी हकीकत बता दी   प्रमिका के साथ गुजारे लम्हों और यादों ने  जिन्दगी के अनमोल वक्त को तबाह कर दिया  और बेचेनी और तडपन भरी दुनिया  दिखादी  अब तो खामोशियाँ  भी खामोश नहीं होने देती   खामोशियों ने ही मोहब्बत की दास्ताँ दुनिया  को सुना दी   अब बस गुमशुम उदास रहता हूँ मोहब्बत  करके  मोहब्बत के कारण दुनिया ने मुझे नाकारा समझा  यही मोहब्बत करने की मुझे दुनिया  ने सजा दी !!!!!!!!!!

सफलता और असफलता के चक्रव्यू में फसी जिन्दगी

Image
         किसी ने सही कहा है की जिन्दगी ऐसी अबूझ पहली है जिसे जिसने जितना समझा वो उतना ही जिन्दगी के सम्बन्ध   में नासमझ या कहे अन्जान होता गया | ,,, जिन्दगी तो   एक ऐसा खेल है , जिसे खेलना तो सबको पड़ता है|पर कुछ लोग उसमे हर दम जीतते रहते हैं   और खुशिया मानते हैं   और कुछ के नसीब   में बस होती है   मायूशी और हर   दम दुखो की बरसात ... खेर जिन्दगी के दो पुत्र और भी है जिन्हें हम सफलता और असफलता के नाम से जानते हैं | यह दोनों हर दम साथ - साथ ही रहते है और चुकीं हैं तो   यह दोनों सगे भाई ही पर दोनों का काम कुछ अलग जरुर है | हा कुछ - कुछ समानता   भी है इनमे   पहली बात तो यह किसी   के भी   सगे नहीं होते हैं | कभी  किसी के गर मातम मनवा देते हैं , तो किसी के घर खुशियों का माहोल बना देते है | इनकी कहानी भी जिन्दगी   की तरह ही अबूझ है | जिसे जितना समझना हो समझ...

गणतंत्र दिवस और कुछ कही कुछ अनकही बातें ....सच के आइने में !!!!!!!!

Image
                                                कहा जाता है की "वक्त की सबसे अच्छी  बात ये है की वह बीत जाता है और शायद सबसे बुरी बात भी यही है" पर कुछ बातें  या घटनाएँ  ऐसी होती है  जो शायद कभी  नहीं बीतती क्यूंकि  वह हमारे दिलों से जुडी हुई है| और दिलकी ख़ुशी और गम सब दिल में ही रहे है, और वक्त आने पर अपने आप ही उभर आते है|  ऐसी ही एक ख़ुशी 15 अगस्त 1947   को हर भारत वासी को मिली जिसकी ख़ुशी वह आज भी दिल में रखे है. और उसका खुमार हर 15 अगस्त को देखने  भी मिलता है| उसके साथ ही साथ नये साल की ख़ुशी के साथ- साथ एक और ख़ुशी हमे हर साल मिलती है   और वो ख़ुशी का दिन होता है २६ जनवरी चूँकि 26 जनवरी १९५०   को ही हमारे देश का संविधान लिख कर पूर्ण हुआ था. और हर देशवासी ने शान  से अपना सर ऊँच...

भीगा मन छलकते आंसू और दम तोडती संवेदनाये !!!!!!!!!!

Image
                         दुनिया में सबसे सुंदर यदि कुछ है तो वह इन्सान ही है क्यूंकि  "विश्व की समस्त सुंदर वस्तुओ का सृजन मानव ने किया है, इसलिए  सृजन करता की सुन्दरता को नाकारा नहीं जा सकता क्यूंकि जब सृजन में ही सुन्दरता का वास होता है और उसको केवल सुंदर मनोभाव वाला ही कर सकता है .....चूँकि मानव के मनोभावों की यदि हम बात हम करे तो उसमे क्रोध मान  माया हास्य रति जुगुप्सा प्रेम सबका समावेश है,और उसकी अच्छी  - बुरी अभिव्यक्ति भी समय समय पर हमारे  अभिप्राय  अनुरूप होती रहती है, इसलिए कहा जाता है की परिणामो की सम्हाल करो या  अपने को  सयंमित   करो क्यों  असयन्मित  जीवन  बिना ब्रक की गाड़ी है , तो जरुरी यह है की हम खुद का परिक्षण प्रतिदिन करते रहे क्यूंकि  स्वपरीक्षण के आभाव में तुम अपने से इतने दूर हो जाओगे की अपने अस्तित्व को भी नहीं खोज पाओगे यही बात स्वामी विवेकानंद जी ने भी कही थी की "दिन में एक ब...