Posts

कुछ व्यक्त सा कुछ अव्यक्त सा {दिल के अल्फाज़ शब्दों में बयां कर-4 }

आप को खिचड़ी बनानी आती है, नहीं मतलब आपको फिर राजनीति भी नहीं आती होगी...अब आप सोच रहे है होंगे की में ये क्या कह रहा हूँ .......सोचिये सोचिये में भी यही चाहता हूँ की आप कुछ न कुछ तो जरुर सोचे ......आखिर इसके आलावा हम कर भी क्या सकते है .....हा हा हा खैर छोडिये खिचड़ी की बात करते है ...जिन्दगी का लगभग १ साल खिचड़ी खा कर गुजारा इसलिए वो मुझे बहुत पसंद भी है ...इसलिए मैने खिचड़ी के उपर बहुत चिंतन किया  और बहुत सारी बाते सामने आई जिन्हें में जरुर बताऊंगा ......दरअसल यह १ ऐसा पकवान है जिसे चाहे न चाहे खाना ही पड़ता है गरीबी में पेट के लिए और अमीरी में बीमारी के लिए ......भाई बहुत पहुची हुई चीज़ है खिचड़ी ....जब कभी राजनेताओ के पास काम नहीं होता तो खिचड़ी पकानी शुरू हो जाती है ....अभी आजकल महंगाई बढने से खिचड़ी बहुत सस्ती हो गई है यत्र तत्र पकाई जा रही है .........अमीर गरीब सब खिचड़ी बनाने में लगे है कोई ममता बनर्जी टाइप ज्यादा तीखी तो कोई मायावती टाइप थोड़ी सी कम तीखी .....हा कोई कोई उपवास वाली मेरा मतलब बिना मसाले की मनमोहन टाइप खिचड़ी भी बना रहा है पर बना सब रहे है .....खिचड़ी बन...

मैं निराश ........

Image
वो चुपचाप सा अहसास  वो आस वो विश्वास   वो कोई अपना सा खास  जिसे पाने का  हो आभास  जाने कब वो पल आयेगा  जब सब कुछ सिमट कर  उसमे ही कही खो  जायेगा और जिसे खोजने का मकसद  भी एक दिन पूरा हो जायेगा  वो है कौन  यह सवाल भी  दिल में हलचल बचाएगा  पर क्या आप सोचते है  की ऐसा कोई इस  दुनिया में  हमको ऐसा कोई  मिल पायेगा  शायद नहीं! नहीं! नहीं!  वो आस वो विश्वास  और आभास  यथार्त में तो  सबकुछ है बकवास  क्योंकि  सब जतन करने पर भी  न जाने कब से अब तक  हूँ मैं  निराश मैं  निराश मैं  निराश !!!!!!                             ABHI AVYAKT  

कुछ व्यक्त कुछ अव्यक्त सा .......{दिल का उफान अल्फाजो के साथ }

      कल झमाझम बारिश देख कर दिल गार्डन गार्डन हो गया ......उसके बाद जब शाम को सड़क पर निकले तो पता नहीं क्यों ऐसा लगा की जिन्दगी की सीरत और सुरत भी एम .पी.की सडको की तरह हो गई है .........जहाँ गड्डे ज्यादा है और रास्ते कम ठीक उसी तरह जिस तरह जिन्दगी में उलझने तो बहुत है पर सुलझने या कहे समाधान कम .......ऐसी उबड़ खाबड़ सड़क होने पर भी लोग चले रहे है क्योंकि चलना तो है ही और शायद यही जिन्दगी है ..........सच में जितना पानी असमान से बरस रहा है उतना ही लोगो की आँखों से भी .....उनकी लाचारी मज़बूरी भले ही कुछ बयां n कर पा रही हो या नहीं पर दर्द का सेलाब इतना है की जितना शायद किसी सुनामी या बाड़ के उफान में नहीं होगा.......पर सरकार की फितरत भी बादलो की तरह हो गई है पहले तो पानी बरसता नहीं है और जब कभी बरसता है तो घरो को भी बहा ले जाता है .......और शायद मंहगाई की मार उसी बरसात का पानी है जो सिर्फ और  सिर्फ आंसुओ की नदियो को भरती है ......खैर हमारी पूजाओ से जिस तरह इन्द्र देवता प्रसन्न हो गए है शायद अन्ना हजारे की तपस्या से सरकार का भी दिल भी प्रसन्न जाये और लोकपाल बिल पारि...

शिक्षक दिवस पर गुरुजनों को समर्पित !!!!!!

 जीवन  शुरू  तुमसे  तुम मे ही  विलय  होता रहे गुरुवर की शरणा तो  मुसफ़िर पथ नहीं खोता इन्ही की राह पर  चल कर हमें जीवन बनाना है इसी बुनियाद पर यारो चलता ये जमाना है ||१|| .तू ब्रम्हा तू ही विष्णु  तू ही महेश बन जाता रहे गुरुवार की शरणा तो कंकर शंकर बन जाता तू तम दूर करता है जलाकर ज्ञान की ज्योति जो तेरा आशीष पा जाता   पतित वो  पावन हो जाता||२|| सभी निर्वाण और विध्वंस गुरु की गोद में खेले प्रभु से वह मुखातिब  हो गुरु के साथ जो होले यही वो मेघ है जो ज्ञान की वर्षा सदा करते ये बरसे तो नहा लेना ये बदल जाने वाले है ||३||

युवाओं सब हाथ तेरे सब साथ तेरे ...हंगामा नहीं हालात बदल तू

Image
                          बहुत दिनों से कुछ लिखा नहीं उसका कारण यही रहा की मेरे दोस्तों  ने मुझसे कहा की तुम लिखते तो अच्छा हो परन्तु बहुत ज्यादा लिखते हो .......इतना टाइम भी  नहीं है पड़ने का   और दूसरी बात पता नहीं कितना घुमा फिराकर लिखते हो .......समझ ही नहीं आया क्या कहूँ क्या न कहूँ इसलिए बस बिना कहे ही रह गया ....जरुरत भी नहीं समझी  कुछ कहने की शायद  मेरे कहने से कुछ फर्क भी नहीं पड़ता ......पर इसमें  मेरी क्या गलती है |मुझे लगा की शायद जो प्यार मोहब्बत की  उलझी हुई बातें समझ जाते है और अपनी प्रयासी के साथ घंटो फोन पर बात कर सकते है ....उन्हें देश के बारे बताने की कोशिश करूंगा तो शायद वो समझ जाये ......पर शायद  अब वो फितरत युवाओं की नहीं रही ....उन्हें बस अपने आप से मतलब है ...हा ऐसी बात नहीं वो देश के लिए कुछ नहीं कर  सकते  बहुत कुछ कर सकते है  अभी भीड़ को बुलाये नारे लगवाइए सब तैयार ...

जाने कहा गये वो दिन .......[यादो का सफरनामा पार्ट -२]

Image
          " ये वक्त तू क्यों नहीं ठहर जाता बस यही             मुझे तेरे बीत जाने का बहुत  अफ़सोस होगा             तेरे जाने के बाद सबकुछ  साथ है हो तो क्या             मेरा अपना ना  कोई  तब   मेरे  साथ  होगा "                              बस ऐसे ही ना जाने क्यों मन शायर सा हो गया था और लोग सच ही कहते है जब मोहब्बत हो जाती है |तो शायरी तो अपने आप ही आ  जाया करती है |और यह बस वहि हुआ| यहाँ मैं  अपनी बात नहीं कर रहा हूँ  क्योंकि  मुझे तो बचपन से ही शायरी  करने का शौक था| मगर मेरे  बाकी "एच ग्रुप" के लोग भी शायरी करने लगे थे,जिसका मुझे बड़ा आश्चर्य होता  था  | अभी आपको दो दिन पहले की ही बात बताऊ जैसे ही हमने शालिनी और खुशबु को विदा किया उनके जाने के बाद ह्रदेश और अमिताभ के सन्देश पड़ कर तो ...

"जिए तो जिए कैसे कहे?कहे कैसे ?रहे कैसे ? .......जिन्दगी के कुछ उलझन भरे सवाल!!!!!!!!!!!!!

Image
                              जब बुरा चलता है ना तब अच्छी बाते और अच्छे लोग बहुत अच्छे लगते है ...क्योंकि  शायद अच्छे लोगो से अच्छी बाते करने से कम से कम अच्छे समय के आने का अहसास तो हो ही जाता है |खैर छोडिये इसे बिगत दिनों से मेरे साथ कुछ खास अच्छा नहीं हो रहा है |और में बार- बार किश्मत को कोसता रहता हूँ या फिर भगवन को पर क्या करूँ  बुरे वक्त की  यही तो बुरी बात है की सिर्फ बुरा ही बुरा  बुरे वक्त में सोचने में आता है |और मैं विगत दिनों से इसी उधेड़बुन में लगा हूँ की आखिर कैसे जिन्दगी को दिशा दी जाये और इस बुरे वक्त से निकला जाये और इसके लिए मैंने काफी चिंतन या कहे विचार किया है और बहुत सारे लोगो से बात भी की है पर शायद कुछ समाधान नहीं निकला अपितु समस्याएँ और पनपती गई है इस समय को आप पनौती  वाला समय भी नाम दे सकते है |बहुत सारे लोगो ने बहुत सारी बाते कही और बहुत सारे समाधान देकर खुद को सलाह  विशेषज्ञ या परोपकारी भी मानने लगे होंगे और मुझे पर हंस भी रहे होंगे ...