Posts

प्रेम- प्रेमालाप, प्रदर्शन, पश्चाताप या फिर पागलपन

Image
ओशो का एक वाक्य है "वासना का नाम प्रेम नहीं पर इसका मतलब यह नही है की वासना को दबाकर  प्रेम को प्राप्त किया जा सकता है ,प्रेम तो उसका नाम है जिसके होते ही वासना की  भावना क्षीण होती जाती है और और उसका अस्तित्व ख़त्म होता जाता है ,सच्चे प्रेम में तो वासना का कही स्थान ही नहीं है जैसे ही प्रेम का सूर्य उदित होता है वासना का अँधेरा अपने आप कही छुप जाता है ,असल में यही वो निर्मलता  है जिसमे  मन का मिलन  होता है या कहे इश्वर का मिलन होता और यही प्रेम आदर्श है | पर जैसे जैसे वक्त ने करवटें बदली प्रेम की परिभाषा  भी अपने आप बदल गई  ....प्रेम बस शब्द रह गया उसके मायने उसका मतलब और अर्थ सबकुछ बदल गया और उसका स्थान ले लिया वासना ने  प्रदर्शन ने या  पागलपन ने  आज  की ज्यादा समझदार  युवा पीडी से प्रेम का मतलब पूछा जाये तो तो उनके चेहरे राक्षसी हसी आ जाती है...खैर गलती उनकी नहीं है ,भागमभाग भरी जिन्दगी में जब इन्सान मशीन बन जाता है तो काम भी मशीनों जैसे ही करता है .सब संवेदनाएं, सचेतनाएं तो उसकी कभी की काल  ...

परेशान बहुत हूँ ..............

Image
हा खुद से भागना चाहता हूँ बहुत दूर कही छिप जाना चाहता  हूँ हा डरता हूँ खुद से लड़ता हूँ खुद से खुद के सपनो से खुद की बातो से अपनों और  अपनेपन के अहसास से  कही दूर बहुत  दूर खो जाना चाहता हूँ अपना साया भी  डराता  है अब मुझेको   अब सारे जहां का साथ भी कचोटता है मुझको ,खुद से ही अब भागता हूँ अब इसी तरह हालत हो गये है मेरे अपने हालत का पता नहीं है मुझको मैंने लोगो से सुना है  की मैं आजकल परेशान बहुत   हूँ .......                     

तेरा ही फल तुझको

Image
                                                                   आखिर क्यों नहीं समझते                                   मेरी मज़बूरी ,क्यों लांघते हो मर्यादाएं                                   मैं भी तो चाहती हूँ की तुम खुश रहो                                   भले...

दो पहलू जिन्दगी के .........

Image
             बहुत कहने सुनने में आता है की हर किसी की जिन्दगी के दो पहलू हुआ करते है शायद हा ! एक पहलू जितना सुंदर होता है दूसरा उतना ही भयाभय पर दोनों जरूरी है |क्योंकि  पहले पहलू की सुन्दरता दुसरे की वीभत्स्यता के कारण  ही तो समझ आती है |सुख का  अनुभव भी दुःख के अनुभव के बाद ही आता है ,क्योंकि असल में कमी का अहसास ही वस्तु को कीमती बना  देता है |खैर यहाँ बात  जिन्दगी के उन दो पहलुओं की करनी है जिसे हमने  न सिर्फ सुना पड़ा या बस देखा नहीं  है जिसे जिया है या कहू तो जी रहे  है  |असल में पड़ा सुना उतना यथार्त का रूप अख्तियार नहीं करता जितना वो होता है, क्योंकि हमें पड़ी सुनी बातो पर भरोसा ही नहीं होता उसे सिर्फ हम कहने सुनने या फिर ज्ञान देने के लिए ही उसका  उपयोग  करते है ,अमल तो बस उन्ही का किया जाता है जिसे हमने जिया है  है या जिसे अनुभव  किया है |        जिन्दगी के दोनों पहलुओ में चकाचोंध बहुत है ,हसी ख़ुशी गम भी...

पूछता होगा वो "''''''''''

Image
पूछता होगा वो क्या कसूर है मेरा क्या मेरे जिस्म को काटकर  पेट भरता है तेरा में भी तो वहि हूँ जो तू है दुःख दर्द प्रेम  का अहसास खुदा का अस्तित्व मुझमे भी कही है सबकुछ तो वहि वहि  और वहि है  फिर क्यों उसके नाम पर सिर्फ  मैं  मैं और मैं  ही   तेरी आन शान बलिदान के लिए  ही होता हूँ  कुर्बान !!!!

जरुरी भी तो है """"""

Image
वो उन्माद और अल्हडपन अब नहीं रहा ऐसा नहीं है की इच्छाएं न हो सब है पर वो वक्त नहीं वो अपने नहीं जिन्हें अपना कहा जा सके हा तथाकथित अपने तो बहुत है पर वो अपने नहीं जो अपने होते तो थे कपडे और चेहरों से परे शोहरत और पद से परे शिकायत किसी से नहीं है हा कभी होती भी है तो वक्त के मत्थे मड देता हूँ क्योंकि वो सब अपने तब तक ही जब तक छद्म हसी और दिखावटी सहानुभूति और साथ है खैर जो कुछ भी है जिन्दगी का हिस्सा ही तो है जरुरी हो या मज़बूरी बात अलग है ...                    "अव्यक्त "

सवाल जवाब

Image
"सवाल सवाल सवाल बस सवालों का जंजाल है शायद जिन्दगी  हर दम हर पल बस सवाल कभी नहीं मिलता उत्तर मिलता भी है तो हजारों सवालों के जन्म के साथ खोजता हूँ में भी उन्हें हर जगह हर  समय जरुरी है क्योंकि नहीं मिलने पर मन कचोटता है बेचैन होता है परेशान करता है लेकिन लेकिन लेकिन मिल जाने पर भी तो यही सब कुछ  करता है मन अब लगता है सवालों को नहीं सवाल खड़े करने वाले को खोजना होगा ???????? उसी में सवाल उसी में जवाब छुपा होगा ,फिर न तो  जबाब होंगे और न ही कभी न ख़त्म होने वाले सवाल  सवाल  और  सवाल !!!!!!!!!!!!!!!